मुझे तुम्हारे भगवान होने पर
संवेदना है तुमसे,
कि तुम इतने कमजोर हो..!
हर बार तुम्हारे अंधे भक्त, तुम्हे बचाते रहते है काफिरों से...!
तुम्हे तालो में बंद देख मुझे अफ़सोस होता है,
और ख़ुशी भी कि मैं कम से कम भगवान् नहीं...
चिरियाघर में बंद जानवरों सा
मैं कौतूहल का विषय नहीं...!
तुम्हारे नाम के चमत्कारों का झूठा इतिहास जहा से भी शुरू होता है,
मैं तह तक जाना चाहता हु,
और पढना चाहता हु
पहला पन्ना, जहा से तुमने रचा यह खेल...
झूठ का, खुद को पूजे जाने का प्रपंच.
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