बदन सुन्न हो रहा है...
बोलने के लिए कुछ शब्द चाहिए...!!!
ऐसा लग रहा है खाली बन्दूक से गोली चला रहा हु....!!!
चुप्पी सर से पाव तक उतरती है....
जैसे बिशुन झा जहर उतार रहा हो....
सुन्न...
बोलने के लिए शब्द चाहिए...!!!
उहापोह है...यह कहू...या फिर वह कहू...
पर यह सब क्यों कहू...?
और फिर कैसे कहू?
बोलने के लिए शब्द तो चाहिए....???
बचपन में एक आम रोपा था...
(आस हर कोई रखता है....)
इस पर कांटे आये है....!
बोलने के लिए कुछ शब्द चाहिए......
एक लम्बी कहानी है.....आम की, बचपन की, कांटो की...आम पे कांटो की....!!
इस लम्बी कहानी के लिए
बहुत सारे शब्द चाहिए...!!
सब सुन्न हो रहा है ....!!!
जहर उतर रहा है?..चढ़ रहा है...?
शब्द चाहिए....!!!
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