सोचता हु
तुम एकदम पराये हो जाने वाले दिन क्या करोगी?
तुम शायद सजोगी, सजना हमेशा ही अच्छा लगता रहा है तुम्हे....!
तुम काली रात में दिए की जोत सा सजोगी...!
पर याद का कोई झोका तुम्हारे अस्तित्व को हिला तो नहीं जाएगा ?
अगर हां तो ...टांग देना अपनी चौखट पे नीम के फूल ...
इस बार मैं सन्देश सही पढूंगा....!!!
मेरे, तुम्हारे सपनो के मरण प्रमाण पत्र देखे मैंने...
और दस्तावेज पे तुम्हारे हस्ताक्षर भी...
तुम्हारा नाम अभी भी उतना ही खूबसूरत है...तुम्हारे कोमल होटो सा...!
एकदम परवसना होने से पहले तुम निहारोगी ....
देर तक आइना....!
तुम्हारे एकदम चले जाने के बाद...
मैंने सोचा है .................................
करूँगा आन्दोलन, फूलो के हित में...
देवताओ के खिलाफ, और उन सब के खिलाफ जो तोड़ते है उन्हें...
कि फूल जिन्दा रहे , बाग़ में, जीवन का उद्देश्य जिन्दा रहे, बाग़ में.
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