Wednesday, October 17, 2012


तुम्हारा जाना यू कचोटता है ,
जैसे कोई कविता खो गयी हो...!!!
वह कविता जो अब याद नहीं,
बस एक धुंधली छाप सी रह गयी हो...!!!
छोटी? बड़ी?
भावुक?प्यार की?
शायद...
प्रसंग भी भूलता है....शायद..
इसीलिए कचोटता है...!!
वह कविता अधूरी,
जो तुमने सुनी अधूरी, मैंने पढ़ी पूरी,
बार बार , कई बार,
इतनी बार की की महत्वहीन हो गयी ...!!!
यका यक खो गयी...

तुम्हारा जाना यू कचोटता है ,
जैसे कोई कविता खो गयी हो...!!!
वह कविता जो किसी ख़ास दिन,
किसी किताब में रह गयी हो,
और अब धुंधली हो गयी हो...
तुम्हारा जाना यू कचोटता है
जैसे कोई कविता खो गयी हो!!!

जोर डाल सोचता हू...
वह क्या था जो बेमिसाल था?
वह जिसका हर शब्द , एक आंसू था....!!
वह कविता जिसमे मैंने अपनी आत्मा निचोड़ लिखी,
वह कविता खो गयी है...!!!

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