यो तो कभी तुम्हारा बुरा भी सोचता है,
दिल, तुम्हे अक्सर खुदा भी सोचता है,
जो तुमने किया वो पैमाना है धोखेबाजी का,
नादां फिर भी बस तेरा सोचता है.
दर्द जिसने दिया उसी से समझने की उमीदे,
बावरा जाने क्या क्या सोचता है....
कोई रात जागता है आधी, तुम्हे पाता है हरशु
खवाब देखता है, और खवाब को सच सोचता है...!
दिल, तुम्हे अक्सर खुदा भी सोचता है,
जो तुमने किया वो पैमाना है धोखेबाजी का,
नादां फिर भी बस तेरा सोचता है.
दर्द जिसने दिया उसी से समझने की उमीदे,
बावरा जाने क्या क्या सोचता है....
कोई रात जागता है आधी, तुम्हे पाता है हरशु
खवाब देखता है, और खवाब को सच सोचता है...!
No comments:
Post a Comment