Sunday, October 14, 2012

दिल चल फिर जोर आजमाते है,
जमाने को हम मुहब्बत सिखाते है!
नफा नुक्सान न सोच,इश्क का सौदा है,
नुकसान से तो बुजदिल घबराते है!
हम गिर चुके बहुत रंजिशे मुहब्बत में,
आ एक दुसरे को उठते उठाते है...

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