इसी बहाने...!!!
Friday, January 4, 2013
आसमान से गिरे, खजूर पर लटक गए,
उसने दुत्कारा तो तेरे दर पे अटक गए।
सुबह निकले थे तो मजिल थी सामने,
शाम हुयी, पाया, फिर से भटक गए!
इश्क जंग से कम नहीं था हमारा,
कुछ तुम्हारा टूटा, कही हम भी चटक गए।
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