उसे और भी सजाएँ देनी थी, वो बेवफा था भी बहुत,
यो हर सजा के पहले बाद, मैं रुका भी बहुत, रोया भी बहुत।
मैं खुद को रोक नहीं पाया सजदा करने से शायद इस कारण ,
जो आज बुरा है बहुत, कभी था अच्छा भी बहुत।
उसके चाहने वाले भी उसी की तरह, बात बदलते रहते है,
कभी उसको बुलाते है सच्चा भी बहुत, कभी धोखा भी बहुत।
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