एक बार तुम आना,
आखिरी बार!
सांझ ढल जाने से पहले मगर।
अँधेरे में पहचान का भरम हो सकता है।
हम, तुम, काठ्गारी ले चलेंगे, मिटटी भर,
स्कूल के पीछे वाले खेत में।
मैं तुम्हारे लिए एक घर बनाऊंगा।
पर वह उस घर में दरवाजा एक ही होगा।
तुम जिद मत करना,
मैं उस दरवाजे पे बैठ रस्सी बाटूंगा ... सुबह तक,
तुम्हारी चारपाई के लिए।
चली जाना अगर दिल करे तो ...मैं रस्सी बाटता रहूँगा।
उस एकलौते दरवाजे पर।
बहुत सारी चीजे इकठी कर रखी है,
तुम्हे देनी है।
मौलसरी के फूल,
माँ ने एक पेरा दिया था, बचा रखा है तुम्हारे लिए,
पुरानी पेटी में रखे सारे करकरिया नोट,
ये सब लेना भूलना मत।
ये सब देना है तुम्हे।
एक बार लौटना,
आखिरी बार।
कम से कम ये सब ले जाने के लिए।
उसी एकलौते दरवाजे की कुण्डी से टांग दूंगा सब कुछ।
ताकि तुम भूल ना जाओ।
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