Thursday, January 10, 2013


आज शाम,
कुछ खुश्क और डूबती हुयी आवाज में
सूरज मुझसे बोला,
की आज डूब जाने से  पहले,
देखना चाहता हु चाँद की परछाई,

कि  आज फिर समंदर के आलिंगन से पहले,
छूना चाहता हु,
चाँदनी एक बार।

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