इसी बहाने...!!!
Thursday, January 10, 2013
एक मुद्दत हो गए हम मुस्कुराए नहीं हैं,
हंस भी नहीं खुल के रो पाए नहीं है,
एक दरस मिले तो जी उठे मेरी डूबती हुयी आँखे,
तेरी तस्वीर तो है, तेरी अदाएं नहीं है।
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