Monday, December 31, 2012

एक सुबह उठता हु,
ख्वाब में खोया हुआ,
मेज पे तुम्हारे लिए गुलाब रखता हु,

शाम होती है, 
मस्जिद में फिर अजान होती है, 
रात भर का सफ़र है नींद की मंजिल तक,
आँखों में रात भर के लिए इंतेज़ार रखता हु।


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