Thursday, January 10, 2013

मैं भाग रहा हु, बदहवास, चारो तरफ मुह किये...
तुम मुझसे दूर जा रही हो...!!!
तुम्हारा चेहरा मेरी तरफ मुड़ाहुआ है....!
दूर जाते हुए!
मुहब्बत में अजीब अजीब चीज़े होती रहती है....
मैं भागते भागते स्कूल पहुँच जाता हु....अपने गाँव...
और मास्टर मुझे मुर्गा बना देता है....!
तुम्हारा चेहरा अब भी मुड़ा है मेरी तरफ...और तुम जाती जा रही हो.
मैं भाग के एक मूरत बनाने लगा हु...
सरस्वती?
चेहरे के खांचे के लिए तुम्हारा सर चाहिए...!!!

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