अभी फिर उतर आया आँखों में खून,
और इस से पहले कि उतर आये,
आँखों के शुष्क, सुर्ख मरुस्थल से,
भाप हो गया।
मेरी उबलती हुयी आँहो में।
उंगलियों से फिर उसके केश फिसल गए ,
बिखर गए।
किसकी जुल्फों को फिर से अम्ह्सूस किया,
अपने नथुनों में।
की सांस लेना भर दूभर हो उठा है।
उसके ख्वाब भी मकडजाल से है।
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