Thursday, January 10, 2013


फिर तेरा गम हो, खवाब हो, शराब हो,
एक उनींदी सुबह हो, बुझते से चराग हो,
दूर तक तुम न हो, तेरा भरम हो सही,
एक तेरी याद हो, खुसबू ए  गुलाब हो,
हो हमारे दरम्यान कुछ इस तरह भी फासले,
दिल डेरा डूबता हो, आँखों में  एक सैलाब हो,
तुम मेरे होकर रहो? ये कभी चाह नहीं,
उस जगह को नेमते, जहा भी तेरा ख्वाब हो।

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