काश तुम अपनी भरी दुनिया में से मुझे कुछ दे पाते...
बदला ही सही..
मैं ?मेरी तो दुनिया ही तुम्हरी है...!
काश की तुम दे पाते मुझे एक एहसास जो कभी मैंने किया नहीं...
और जिसे मैंने कभी जिया नहीं...!
अभी नीम की पत्तिया झड चुकी है...
और उन पर आ गए है सफ़ेद सफ़ेद छोटे छोटे फूलो के गुछे...
पर ठीक इसी वक़्त ऐसा क्यों है कि..
लाल फूलो वाला पेड़ उदास है...
कोई पत्ता तक नहीं!!!!!!!
काश कि तुम उसे कुछ पत्ते दे देते...!
पत्ते जो इस मौसम में उसे हमेशा छोड़ देते है...
तुम मेरी कविताएं नहीं समझ पाओगे...
मैं खुद भी नहीं समझ नहीं पाता...
काश कि तुम उन बच्चो को दे पाते कुछ साहस और कुछ सम्मान...
जिन्हें मैंने कल भी डांटकर भगा दिया...
जब वो रोती सूरत लेकर मुझे दुआ दे रहे थे..
मैं क्या दू? मेरी तो सारी दुनिया ही तुम्हारी है...!!!
मैंने उनको दिए सपने...उनको थोथापण लगा...!
काश कि तुम तैरना जानते...या कि मेरी होती टाँगे...
और हम दो किनारे न होते...!
एक धार होते ....
हिमालय से लेकर सिन्धु तक बहने वाली
एक धार.
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