Saturday, May 28, 2011

सुनो

बहाने दो मुझे आंसू,

आत्मा को पवित्र करती है ये निर्मल अश्रुधारा,

और हाँ जिस दिन मेरे आंसू रुक जाएँ

समझ लेना की मेरे भीतर का इंसान मर गया,

मेरे अन्दर इंसानियत ख़तम हो चुकी...

सुनो

उस दिन के बाद

मुझसे इंसानों सा मिलना..

वज़ह?एक जानवर को इंसान ही संभाल सकता है...

किन्तु एक सश्य है...

कि तुम्हारे अन्दर का इंसान तो कब मर चुका!

निश्चय ही

हम और तुम आमने सामने होगे...

उस दिन जिस दिन मेरे आंसू रुक जायेंगे..

सुनो.

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