टूटे हुए खवाब के शोशे यूँ चुभते है...
जैसे किसी पुराने गहरे घाव का निशाँ दिखाई देता है...
और एक धुंधली सी कहानी उभरती है.
धुंधले नाम, धुंधले चेहरे और धुंधली स्मृतियाँ..!
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