Friday, February 21, 2014

 चीखती ख़ामोशी तेरी और चुपचाप  मेरे आंसू,
पर्वतो से उतरती शाम से, घहराते उदास मेरे आंसू,

हु एक अभिसार किये मैं बड़ा पत्थर दिल,
मुझे परवाह नहीं दुनिया की, और मेरे खिलाफ  मेरे आंसू 

मैं न चाहू कोई रिश्ता तुझसे,ये सही की नाउमीद भी हु,
पर ये कातरता, उफ़! आखिरी प्रयास मेरे आंसू!

रौनकें तेरे पास तूने पाया इश्क में ये, तू कलंदर था,
मैं तो बस आशिक था, मेरे पास? मेरे आंसू!

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