मैं नहीं हार सकता,
की मैं उम्मीद हु,
घुप्प अँधेरे में आशा की किरण!
मैं विश्वास हु किसी की श्रधा का,
भक्ति का।
बुढाती हुयी उन आँखों की जोत हु,
जो जानते है
सपनो का सच झूठ!
हमेशा, खूबसूरत, अप्रयाप्य।
मैं बढ़ते हुए चश्मे के नुम्बेरो में
डूबती हुयी ज्योति में भी
अटल आतामाविश्वास हु,
जो जानते है दुनिया को और पहचानते है संघर्ष को,
जद्दोजहद को,
करीब से, आत्मीय की तरह।
मुझे नहीं डूबना है तट परखड़े लोगो के लिए,
आस के लिए!
मुझे लड़ते रहना है!
No comments:
Post a Comment