उनके सपने बड़े थे मैं आदमी छोटा निकला,
मैंने पत्थर समझा वो सचमुच का खुदा निकला,
अभी बारीकी से वो मेरी रूह में है शामिल,
उसको छूकर मेरे नथुनों से हवा का झोंका निकला
आना जाना लगा रहता है, दर्द क्यों हो?
पर उसकी गली से निकला तो आज टूटा निकला।
उसके अभिमान की हनक है वो मुझे तोड़ेगा,
मेरे सपनो में वो ही मेरा आइना निकला
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