प्यार गठबंधन की सरकार सा रहा तेरा मेरा,
विचारधाराओ से परे,
महज स्वार्थ पर आधारित।
दाव पेंचो से भरा,
विपक्ष के सामने डगमगाता
और एक दुसरे पे दवाब बनाता।
मीडिया सा रहा,
व्यावसायिकता की पराकाष्ठा
व्यक्तिवाद का अनुयायी,
नए नए मानदंड बनाता हुआ,
नित नवीन प्रतिमान गढ़ता हुआ, अपने हिसाब से!
साहित्यकारों सा लापरवाह,
न मानने की जिद,
वाद और परम्पराव में बंटा
अनेक्मत हर वक़्त,
ख्यालो के संसार में प्यार!
वैज्ञानिकों सा
दुनिया से बेखबर,
सिर्फ अपने आप में
अपनी धुन में,
ये तेरा मेरा प्यार
बेहद अस्वाभाविक ढंग से स्वाभाविक
हर प्यार की तरह,
हमेशा की तरह!
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