Saturday, December 22, 2012

पेंडुलम ...के लिए।

अब आओगे? कि  नया साल आता है।
कब से आग पर रहा है , ढूध में उबाल आता है!

तेरे गम से नापता हु मैं दुसरे सारे गम,
ग़म कोई भी हो, तेरा ख्याल आता है !

तुमने कभी पोछ दिया था मेरे माथे से पसीना,
अब भी मेरे अहसास में वो रेशमी शाल आता है।

गलत तुम भी थे, गलत मैं भी बहुत था,
एक सही मैं करू? एक तुम करो, इश्क अब भी बेमिसाल आता है!

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