जितने यकीन से खड़ा होता हु,
उतने लरज से ही टूट जाता हु।
तुम परदेशी से चले जाते हो,
मैं गाँव सा पीछे छूट जाता हु।
तुम आते हो गंडक में बाढ़ सा,
मैं नौसीखिया तैराक, डूब जाता हु।
तुम एक नज़र देख लेते हो,
मैं कुप्पे सा फूल जाता हु,
तुम आंसू देकर हंसी खरीदते हो,
मैं हंसी के बदले आँसू ढूंढ लाता हु।
तुम चार आना तक याद रखते हो,
मैं?जिंदगी तक भूल जाता हु।
तुम ताजमहल पे फोटो खिचाते हो,
मैं मिट्टी के चुक्के बनाता हु।
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