Monday, December 31, 2012

एक सुबह उठता हु,
ख्वाब में खोया हुआ,
मेज पे तुम्हारे लिए गुलाब रखता हु,

शाम होती है, 
मस्जिद में फिर अजान होती है, 
रात भर का सफ़र है नींद की मंजिल तक,
आँखों में रात भर के लिए इंतेज़ार रखता हु।


Monday, December 24, 2012

जितने यकीन से खड़ा होता हु,
उतने लरज से ही टूट जाता हु।
तुम परदेशी से चले जाते हो,
मैं गाँव सा पीछे छूट जाता हु।
तुम आते हो गंडक में बाढ़ सा,
मैं नौसीखिया तैराक, डूब जाता हु।
तुम एक नज़र देख लेते हो,
मैं कुप्पे सा फूल जाता हु,
तुम आंसू देकर हंसी खरीदते हो,
मैं हंसी के बदले आँसू ढूंढ लाता हु।
तुम चार आना तक याद रखते हो,
मैं?जिंदगी तक भूल जाता हु।
तुम ताजमहल पे फोटो खिचाते हो,
मैं मिट्टी  के चुक्के बनाता हु।

Saturday, December 22, 2012

पेंडुलम ...के लिए।

अब आओगे? कि  नया साल आता है।
कब से आग पर रहा है , ढूध में उबाल आता है!

तेरे गम से नापता हु मैं दुसरे सारे गम,
ग़म कोई भी हो, तेरा ख्याल आता है !

तुमने कभी पोछ दिया था मेरे माथे से पसीना,
अब भी मेरे अहसास में वो रेशमी शाल आता है।

गलत तुम भी थे, गलत मैं भी बहुत था,
एक सही मैं करू? एक तुम करो, इश्क अब भी बेमिसाल आता है!

Wednesday, December 19, 2012

किसकी दस्तक सुनकर जाने, अश्को ने दरवाजे खोले,
आशाओं के तीरों से बिंध,  नैन मेरे फिर से बोले!
कितनीं बारी दिल को जाने चुप कराया हमने,
आज मगर हमने भी बोला , दिल चल मिलकर रोंले !
हम उनके थे, उनके है, उनके ही रहेंगे, ना जाने कब तक,
वो जिनको होना चाहे, हो ले!!!

Sunday, December 16, 2012

पेंडुलम ..तुम्हारे बाद !

बड़ी तबियत से मिलता हु रकीबो से आजकल  
कौन जाने किसके काँधे पे तेरे गेसू निकले।
तेरी याद आये तो एक एक के घर जाता हु,
खुदा  जाने किसके  घर से तू निकले। 
तुझसे भी मुश्किल है इस दिल को समझना
तेरी हंसी पे भी रोया, तेरे गम से भी आंसू निकले।
कभी यो भी हुआ है, तू न मिला, तुझे ढूँढा बौअराय ,
और खुद को ढूंढू तो तू निकले!