Monday, February 25, 2013

जब तुमने रच ये खेल ,
तो नियम भी बताने थे तुम्हे,
मुझे तो अब लगा है 
जब मैं बदहवास औंधा पड़ा हु,
और दर्शक तालिय पीट रहे है,
कि  यह सब खेल था!!!
चलो माना तुम जीते, 
पर नियम तो बताने थे!!!
तुम्हारे खेल के तुम्हारे कायदे!
देखो तुम्हारा कोई दोष नहीं, 
पर मुझे चोट नहीं लगती ,
मैं गिरता नहीं, 
अगर मुझे कायदे मालूम होते!
तुम भी खुदा  निकले 
 कठपुतली घुमाते सा  रहे!

No comments:

Post a Comment