Monday, February 6, 2012

मुझे झूठ में बहुत विश्वास है

सच इतना अकेला और असहाय था
मुझे उसका भरोसा न हुआ,
यो लगा, वो भिखारी सा मुझसे पैसे मांगेगा,
भूख के नाम पर
और कोने में जा सिगरेट पिएगा.
यकीन मानिये मेरी एक अवधारणा है
भिखारियों के लिए..और
मैं सैधांतिक तौर पर खिलाफ हु
भीख के, भिखारियों के...!!!
झूठ बड़े ठाट मैं आया...
रोब के साथ...मेरी आँखों में आँखे डाल बाते की..
उसके अनुययियो की भीड़ थी .......चारो तरफ
सबने नकाब पहन रखे थे,
और नकाब झूठ बोल रहे थे...
मैंने चढ़ावा दिया...और उनका आश्वाशन लिया...
मुझे झूठ और उसके आडम्बरो में बहुत विश्वास है.
ये बदल चुके है दुनिया.

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