Monday, February 6, 2012

मिर्गी के दौरे हर पल नहीं आते...!

उस रात जब रोशनी जयादा थी और अँधेरा कम ,
चकाचौंध इतनी की लोगो को नीद नहीं आ रही थी...
कुछ पागलो सा नाच रहे थे या फिर चिल्ला रहे थे...
मैं सपने देख रहा था...
तुम्हारी याद में.
या फिर उन भूतो के डर से आँखे बंद रखी थी ,
जो बचपन से अब तक
आये नहीं, पर डराया बहुत ....काले होते है वो!!
यकीन मानो नींद भी तुम्हारी तरह बदचलन है...!

मैंने जागते सपनो में तुम्हे कई रंगों में देखा...
खूबसूरत,
तुम किसी गाडी में बैठ कही अदेश जा रही थी...
अपता, अनोखी जगह....जहा घरो से जयादा दरवाजे है...
फिर भी कोई लौटता नहीं...!

कुछ शुभ चिंतको ने मेरे जिन्दा होने - रहने की संभावनाओं को टटोला...
और मेरे सलामती की खबर पाकर मायूस हुए शायद
किसी अख़बार वाले की तरह
जो जिन्दा जलते आदमी की फोटो लेने गया हो...
और उस आदमी को सिर्फ जिन्दा पाया हो..जलते नहीं...
मैं आपकी निराशा समझता हु...पर
साहब,
मिर्गी के दौरे हर पल नहीं आते...!

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