मन रे चलो अब दूजो सराय,
बड़ी राह तकी,
घनी रात भयी,
सजन रहो कही बिसराय....
मन रे चलो अब दूजो सराय ....!!!
आंखन में धधक धधक नीर बुझे...!
अब बहुतही अकेले पीर सहे,
इक उमर हमारी आसन बीती ....
अब रहो मन अकुलाय!!!
मन रे चलो अब दूजो सराय!
एक बात हमारी बस समझ न आई,
तुमने क्यों झूठी आस दिलाई...?
क्यों मीठी बात बनायीं...?
तुम रहो कहा नुकाय?
मन रे चलो अब दूजो सराय...!!!
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