Monday, July 4, 2011

आवारा...!

वो आखिरी पुल भी ढह गया, कल रात देखा खवाब में,
वो अजीब तुम्हारा बाग़ था, सिर्फ कांटे आये गुलाब में!!


तुम न होगे तो तेरे साये से लिपट के रो लेंगे,

कैसे भी कर के ए बेगाने,हम तेरे हो लेंगे .!!

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