Friday, July 22, 2011

तुम हो कि, तुम्हे सब कुछ याद नहीं आता,

मैं हूँ कि सब कुछ भूल नहीं पाता.

लोग हैं, कि कहानिया बदस्तूर है ,तुम्हारी मेरी,

ये तेरा दामन, मुझसे छूट नहीं पाता.

उम्मीद है कि बाकी रहती है आधी अधूरी ही सही,

दिल है कि अच्छे से टूट नहीं पाता.

मेरे आँखों के चराग में तेल है खवाब तेरे


Monday, July 4, 2011

आवारा...!

वो आखिरी पुल भी ढह गया, कल रात देखा खवाब में,
वो अजीब तुम्हारा बाग़ था, सिर्फ कांटे आये गुलाब में!!


तुम न होगे तो तेरे साये से लिपट के रो लेंगे,

कैसे भी कर के ए बेगाने,हम तेरे हो लेंगे .!!