Sunday, January 23, 2011

आज फिर महसूस हुआ की
तुम्हे खो दिया है...!
नसों में खून जमने लगा है...
की तुम्हे खो दिया है...!!!
चेतना भावनाओ के चक्रवात में
अदृश्य हो गयी है...
तुम्हारे चहरे का उड़ा रंग,
कही किसी के माथे पे दर्प बन चमक रहा है
.................................................!!!!
और लगा की तुम्हे खो दिया है...............!!!
उतेज़ना के शीर्ष से,
शिथिलता के पाताल तक ....
अचेतन, मन रो दिया है....
आज फिर महसूस हुआ , तुम्हे खो दिया है...!!!

तुम्हारी आँखों में , मौन /मूक आँखों में...
सन्देश नहीं थे,
संकेत नहीं थे....
मैंने आश्वासन पढ़ लिया......!!!
सहसा बोलती तुम्हारी आँखों ने,
विषाक्त अधरों के विश्फुरण ने ,
चौंका दिया....
और मन रो दिया...!
...............आज फिर महसूस हुआ की तुम्हे खो दिया है...!

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