तुम आना
किसी अमावास की रात को,
हम साथ मिल चाँद ढूँढने चलेंगे...!!!
पोखर वाले पीपल के नीचे से गुजरते हुये
हम थामे रहेंगे एक दुसरे का हाथ...!!!
अपने अपने डरो को मुठियो में..अपने तलहथियों में पसीने के संग बहा देंगे...!!!
हाँ, तुम किसी रस्सी को साप समझ लिपटना मत जाना...
एकाएक ..!!!
तुम्हारे डर जाने से सबसे जयादा डर लगता है मुझे...!!!
तुम और कस पकड़ना मेरा हाथ...
हम रास्ते पड़े सापों से पूछेंगे
उनकी दोहरी जबान का कारण...?
और उनके जहर उगलने का भी...!!!
या फिर उन्हें गले में डाल खेलेंगे
शिव पार्वती सा कोई खेल ....!!
तुम आना जब सहदेव सहनी के डेरे में बुझे जाए धुंआ...
रात की आखिरी ट्रेन के वक़्त....
हम कोई नहीं लौटने वाली जगह चले जायेंगे,
एक दुसरे का हाथ थामे...
पर तुम आना...
मुझे पोखर वाले पीपल के नीचे से अकेले गुजरते बड़ा डर लगता है...!!!