वो अक्सर ही खेलता था मुझसे खुदा की तरह ,
पर उस शाम मैं डरा तो, उसने सीने से लगा लिया...!!!
अब जिस शख्स से मिलता हु,डरता हु, शक करता हु,
क्या करू उसका मैंने भरोसा बहुत किया...!!!
तुमने चाहा कि मुझे चोट न लगे, तुम न जानो
तुम्हारी इस चाह ने हमारा कितना बुरा किया...!!!
मैं तो हर पल जान देने की बात करता था,
मुहब्बत साबित करने को उसने एक उम्र जीने का वास्ता दिया...!!!